उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के बेसिक स्कूलों में मिड-डे मील बनाने वाले रसोइयों के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। अब तक ₹2,000 प्रति माह मिलने वाला मानदेय बढ़ाकर ₹3,000 प्रति माह कर दिया गया है, जो रसोइयों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी।
मानदेय बढ़ोतरी का क्रम
मिड-डे मील रसोइयों के मानदेय में यह बढ़ोतरी एक चरणबद्ध प्रक्रिया रही है:
- पहले चरण में: रसोइयों को मात्र ₹1,000 प्रति माह मानदेय मिलता था
- दूसरे चरण में: इसे बढ़ाकर ₹2,000 प्रति माह किया गया
- तीसरे चरण में (वर्तमान): अब इसे और बढ़ाकर ₹3,000 प्रति माह कर दिया गया है
यह निर्णय उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने बाई-सर्कुलेशन प्रक्रिया से मंजूरी दी है, जिसके बाद इसका शासनादेश भी जारी कर दिया गया है।
किन रसोइयों को मिलेगा लाभ?
इस फैसले का सीधा लाभ प्रदेश में काम कर रहे करीब 3.53 लाख रसोइयों को मिलेगा। ये रसोइया मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों में स्थित परिषदीय स्कूलों में मिड-डे मील तैयार करने का काम करती हैं।
नई व्यवस्था कब से लागू होगी?
बढ़ा हुआ मानदेय सितंबर 2026 से लागू माना जाएगा। इसकी राशि अक्टूबर में मिलने वाले मानदेय में जोड़कर दी जाएगी, यानी रसोइयों को अक्टूबर के महीने में सितंबर और अक्टूबर दोनों महीनों का संशोधित मानदेय एक साथ मिलेगा।
रसोइयों के योगदान को सराहना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर प्रदेश के सभी मिड-डे मील रसोइयों को बधाई दी है। इन रसोइयों का योगदान मिड-डे मील योजना को सफलतापूर्वक चलाने में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि ये प्रतिदिन लाखों स्कूली बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं।
मिड-डे मील योजना का महत्व
मिड-डे मील योजना भारत सरकार की एक प्रमुख कल्याणकारी योजना है, जिसका उद्देश्य स्कूली बच्चों को पौष्टिक भोजन प्रदान करना और स्कूलों में नामांकन व उपस्थिति बढ़ाना है। इस योजना के तहत रसोइया-सहायक भोजन तैयार करने और वितरण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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