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69000 शिक्षक भर्ती: संजय निषाद आवास के बाहर प्रदर्शन

69000 शिक्षक भर्ती: लखनऊ में 69,000 शिक्षक भर्ती के आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने फिर से आंदोलन का रास्ता चुना है। रविवार को कैबिनेट मंत्री संजय निषाद के आवास के बाहर प्रदर्शन करते हुए अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे सामूहिक भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

अभ्यर्थियों का कहना है कि 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती प्रकरण में आरक्षण संबंधी विसंगतियों के बाद शासन द्वारा 5 जनवरी 2022 को लगभग 6,800 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की गई थी। इस सूची में ओबीसी और दलित वर्ग के उम्मीदवार शामिल थे, जिन्हें चार साल बीत जाने के बाद भी नियुक्ति पत्र नहीं मिल सका है।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि सर्वोच्च न्यायालय में 8 सितंबर को इस मामले की सुनवाई तय है, लेकिन सरकार सुप्रीम कोर्ट में उन अभ्यर्थियों का पक्ष नहीं रख रही है, जिनकी चयन सूची चार साल पहले ही जारी हो चुकी है। उनके अनुसार, 6,800 ओबीसी व दलित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिलना था, लेकिन यह नहीं हो पा रहा है।

मंत्री से मुलाकात और ज्ञापन सौंपना

रविवार को मत्स्य मंत्री संजय निषाद अपने आवास में उपस्थित थे। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों को उन्होंने बुलाकर मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। अभ्यर्थियों ने मंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें उनकी नियुक्ति संबंधी मांगें दर्ज थीं।

अभ्यर्थियों ने बताया कि जब वे निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी से मिलने जाते हैं और निवेदन करते हैं कि कोर्ट में 6,800 की चयन सूची को प्रोटेक्ट करने की बात कही जाए, तो वह कहते हैं, ‘मैंने नहीं निकाली 6,800 की चयन सूची। मैं उस समय नहीं था।’ जिसने निकाली है, उनसे जाकर मिलो। जब अभ्यर्थी कहते हैं कि मुख्यमंत्री के आदेश से निकली थी, तो अधिकारी कहते हैं कि मुख्यमंत्री से ही जाकर बोलो, मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता।

आंदोलन की चेतावनी

आंदोलन में शामिल यशवंत ने बताया कि आज से शुरू यह आंदोलन अब अनवरत चलेगा। अगर उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री से नहीं कराई गई तो वे लोग सामूहिक भूख हड़ताल पर बैठेंगे। प्रदर्शन में गंगा शरण, नजमा, अमर मौर्य, चंदन, संजय, संगम निषाद आदि मौजूद रहे।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि नियुक्ति और न्याय की मांग को लेकर है। लखनऊ की सड़कों पर एक बार फिर ‘आरक्षण दो, न्याय दो’ के नारे सुनाई दिए।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि 69,000 शिक्षक भर्ती मामले में आरक्षण के नियमों को लेकर इन वर्गों के 6,800 अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति के लिए भूखे-प्यासे लगातार आंदोलनरत हैं, उनके बारे में भी सरकार को पूरी सहानुभूतिपूर्वक जरूर सोचना चाहिए। क्योंकि उन्हें भी सरकार ही राहत दे सकती है।

वर्ष 2024 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती के लिए पहले की चयन सूचियों, जिसमें 6,800 अभ्यर्थियों वाली सूची भी शामिल थी, को रद्द करके नई चयन सूची तैयार करने का आदेश दिया था। तब से यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और अभ्यर्थी नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

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