लखनऊ में हिंदू युवा वाहिनी से जुड़े नेता और महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह (45) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनका शव दुबग्गा थाना क्षेत्र में एक नहर से बरामद हुआ, जबकि पुलिस ने ड्राइवर समेत कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है।
धीरेंद्र प्रताप सिंह दो दिन से लापता थे। रविवार शाम करीब 5 बजे उनका शव लखनऊ जिला मुख्यालय से लगभग 22 किमी दूर दुबग्गा इलाके में एक छोटी नहर से मिला। शव पर माथे और सीने में गोली के निशान पाए गए। पुलिस का कहना है कि हमलावरों ने पहले चलती फॉर्च्यूनर गाड़ी के भीतर उन्हें बेहोश किया, फिर दो गोलियां मारीं और बाद में शव को नहर में फेंक दिया।
पुलिस को धीरेंद्र की फॉर्च्यूनर एसयूवी सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र से मिली, जो शव बरामदगी स्थल से करीब 15 किमी दूर है। फॉरेंसिक टीम ने मौके और वाहन की जांच की।
जांच और गिरफ्तारियां
लखनऊ पुलिस ने छह टीमें बनाकर जांच तेज की। सीसीटीवी फुटेज और अन्य सुरागों के आधार पर पुलिस ने कहा कि हत्या में धीरेंद्र के अपने ड्राइवर रवि किशन और उसके साथियों का हाथ है। ड्राइवर समेत कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। एडीसीपी दक्षिण के अनुसार, प्राथमिक जांच में हत्या का मकसद जमीन/प्रॉपर्टी विवाद सामने आया है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, धीरेंद्र प्रताप सिंह उन्नाव के फतेहपुर चौरासी क्षेत्र के राजेपुर निवासी थे और लखनऊ में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम भी करते थे। पुलिस सूत्रों ने बताया कि उन्नाव में करोड़ों रुपये की जमीन को लेकर विवाद चल रहा था, जिसमें ड्राइवर ने कथित तौर पर प्रतिद्वंद्वियों के साथ मिलकर सुपारी लेकर हत्या की साजिश रची।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
धीरेंद्र प्रताप सिंह हिंदू युवा वाहिनी से जुड़े रहे हैं और भाजपा के कुछ प्रमुख नेताओं के संपर्क में भी बताए जाते हैं। इस हत्याकांड के बाद लखनऊ में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं, खासकर तब जब एक जानी-पहचानी शख्सियत की अपनी ही गाड़ी में गोली मारकर हत्या कर दी गई। स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर व्यापक चर्चा है।
पुलिस ने हत्या, अपहरण और साजिश रचने की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। ड्राइवर और अन्य संदिग्धों से सख्ती से पूछताछ की जा रही है। जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि कौन-कौन इस साजिश में शामिल था और जमीन विवाद की असली तस्वीर क्या है।
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