Nepal Flood Latest News: नेपाल में 26 अगस्त की सुबह आई अचानक और बेहद तेज फ्लैश फ्लड ने कुछ ही समय में बड़े इलाके को तबाही में बदल दिया। तिब्बत सीमा से सटे नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और आसपास के क्षेत्रों में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। तेज बहाव अपने साथ घर, सड़कें, पुल, वाहन और बिजली परियोजनाओं का मलबा बहाकर ले गया। 27 अगस्त की सुबह तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक नेपाल में कम से कम 157 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं।
24 घंटे में कितना हुआ नुकसान?
नेपाल सरकार के अनुसार, इस बाढ़ से कम से कम 200 अरब नेपाली रुपए (लगभग 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर) का बुनियादी ढांचे को नुकसान हुआ है।
जान-माल का नुकसान
- मृतकों की संख्या: 157 से 160 (नेपाल पुलिस के अनुसार)
- लापता लोग: 750 से अधिक, जिनमें 341 विदेशी नागरिक शामिल हैं
- घायल: कम से कम 93 लोग
- भारतीय नागरिक: 133 भारतीय तीर्थयात्री लापता बताए गए हैं
- संपत्ति और बुनियादी ढांचे का नुकसान
- पुल: 19 से अधिक मोटर योग्य पुल बह गए या क्षतिग्रस्त हो गए
- सड़कें: 40 किलोमीटर पक्की सड़कें तबाह हो गईं
- हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट: एक दर्जन से अधिक जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुईं
- घर और बस्तियां: सैकड़ों घर और बस्तियां बह गईं
- शैक्षणिक संस्थाएं: कई स्कूल और शिक्षा केंद्र नष्ट हो गए
बाढ़ का कारण और प्रभाव
यह बाढ़ तिब्बत में हुए हिमस्खलन और चट्टानों के गिरने से triggered हुई थी। त्रिशूली नदी में पानी का स्तर केवल आधे घंटे में 27 फीट तक बढ़ गया था।
रसुवा और धादिंग जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के कारण सीमावर्ती बस्तियों में भारी तबाही हुई और कई गांव पूरी तरह बह गए।
बचाव कार्य और राहत प्रयास
नेपाल सरकार ने तत्काल बचाव कार्य शुरू किए हैं। सुरक्षा बलों, पुलिस और स्थानीय लोगों को बचाव अभियान में लगाया गया है।
भारत ने भी राहत सहायता भेजनी शुरू कर दी है। भारतीय वायु सेना के विमानों से राहत सामग्री नेपाल भेजी जा रही है।
चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी 3 लोगों की मौत और 265 लोग लापता बताए गए हैं।
पर्यटकों की स्थिति
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, 384 पर्यटक लापता हैं, जिनमें 291 विदेशी नागरिक शामिल हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, मलेशिया और अन्य देशों के पर्यटक भी इसमें शामिल हैं।
आगे की चुनौतियां
नेपाल सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को खोजना और राहत कार्य जारी रखना है। बाढ़ के कारण कई क्षेत्रों में पहुंचना मुश्किल हो गया है।
जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियल आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) का खतरा बढ़ गया है, जिससे भविष्य में ऐसी आपदाओं की संभावना बढ़ सकती है।
Also Read:- रक्षाबंधन पर आगरा से दिल्ली-जयपुर के लिए बढ़ेंगी रोडवेज बसें, जानें पूरा प्लान






