नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत गिरने की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि मलबे में अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत और बचाव दल लगातार मलबा हटाकर लोगों की तलाश में जुटा है।
40-50 साल पुरानी थी इमारत
जानकारी के मुताबिक, हादसे का शिकार हुई इमारत करीब 40 से 50 साल पुरानी बताई जा रही है। इस इमारत में पीजी हॉस्टल संचालित होने की बात सामने आई है। हादसे के समय इमारत के बेसमेंट में मरम्मत या निर्माण से जुड़ा काम चल रहा था।
इसी दौरान अचानक इमारत का ढांचा भरभराकर गिर गया और वहां मौजूद लोग मलबे में फंस गए। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचा और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
मलबे में अब भी लोगों के दबे होने की आशंका
हादसे के बाद मलबे में 15 से 20 लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। बचावकर्मी भारी मशीनों और अन्य उपकरणों की मदद से मलबा हटाने में जुटे हैं। रेस्क्यू के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि मलबे के नीचे मौजूद किसी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे।
मलबे के नीचे से फोन कॉल आने की जानकारी ने बचाव अभियान को और महत्वपूर्ण बना दिया है। ऐसे में टीमों की कोशिश है कि संभावित रूप से जिंदा फंसे लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।
हादसे के पीछे कौन? उठ रहे कई सवाल
इस घटना के बाद अब इमारत की सुरक्षा और निर्माण से जुड़े कई सवाल सामने आ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी पुरानी इमारत में बेसमेंट में काम किस अनुमति के तहत किया जा रहा था और क्या निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था?
इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि क्या इमारत का नक्शा स्वीकृत था। यदि पांच मंजिला इमारत के निर्माण की अनुमति नहीं थी, तो निर्माण को समय रहते क्यों नहीं रोका गया? इमारत की संरचनात्मक मजबूती की जांच हुई थी या नहीं, यह सवाल भी जांच के दायरे में है।
जांच के बाद सामने आएगी जिम्मेदारी
फिलहाल हादसे की वास्तविक वजह और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। प्रशासन द्वारा इमारत से जुड़े दस्तावेजों, निर्माण कार्य और सुरक्षा मानकों की जांच की जा सकती है।
हादसे ने दिल्ली में पुरानी इमारतों की सुरक्षा और अवैध या असुरक्षित निर्माण की निगरानी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और हादसे की पूरी वजह का पता लगाना है।
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