लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत सहायकों के मानदेय को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत स्तर पर काम करने वाले हजारों पंचायत सहायक लंबे समय से कम मानदेय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारियों की ओर से मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि मौजूदा महंगाई के दौर में 6000 रुपये मासिक मानदेय में परिवार का खर्च चलाना बेहद मुश्किल है।
58 हजार से ज्यादा पंचायत सहायकों के सामने आर्थिक चुनौती
उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायक ग्रामीण स्तर पर विभिन्न सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों को जमीन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पंचायत भवनों में ऑनलाइन सेवाओं, दस्तावेजों से जुड़े कार्यों और ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने जैसे कामों में पंचायत सहायकों की भूमिका रहती है।
बताया जा रहा है कि प्रदेश में 58,000 से अधिक पंचायत सहायक कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों को लंबे समय से करीब 6000 रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है। पंचायत सहायकों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में महंगाई तेजी से बढ़ी है, लेकिन उनके मानदेय में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हुई है।
महंगाई के दौर में 6000 रुपये कितने पर्याप्त?
आज के समय में किराया, राशन, बच्चों की पढ़ाई, बिजली, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में 6000 रुपये महीने की राशि किसी परिवार के लिए पर्याप्त है या नहीं, यह बड़ा सवाल है।
पंचायत सहायकों का तर्क है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार के डिजिटल और प्रशासनिक कामों को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं। इसके बावजूद यदि उनका मानदेय लंबे समय तक एक ही स्तर पर बना रहता है तो उनके लिए आर्थिक रूप से टिके रहना कठिन हो जाता है।
आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए सरकार की पहल पर भी उठे सवाल
पंचायत सहायकों के मानदेय का मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है, जब प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों और सम्मानजनक वेतन को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि सरकार अलग-अलग वर्गों के कर्मचारियों के वेतन और मानदेय को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठा रही है तो पंचायत सहायकों की समस्याओं पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
पंचायत सहायकों की मांग है कि सरकार उनके काम और जिम्मेदारियों को देखते हुए मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करे। उनका कहना है कि केवल योजनाओं की घोषणा या व्यवस्थाएं बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में वास्तविक सुधार होना चाहिए।
सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग
पंचायत सहायकों का कहना है कि वे ग्रामीण जनता और सरकार के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम कर रहे हैं। ऐसे में उनकी मांगों को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
सरकार से मांग की जा रही है कि पंचायत सहायकों की समस्याओं पर जल्द बातचीत की जाए और उनके मानदेय में मौजूदा महंगाई तथा काम की जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए उचित बढ़ोतरी की जाए।
पंचायत सहायकों का सवाल साफ है कि यदि उनसे जिम्मेदारी के साथ काम लिया जा रहा है, तो क्या उन्हें और उनके परिवारों को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार नहीं है? अब नजर सरकार के अगले कदम पर है।






