BRICS देशों के बीच डिजिटल करेंसी से क्रॉस-बॉर्डर भुगतान आसान बनाने की तैयारी, डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश
BRICS-New-Payment-System: भारत की अध्यक्षता में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले समूह के भीतर डॉलर पर निर्भरता कम करने और आपसी व्यापार को आसान बनाने की कोशिशों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। BRICS देश लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर की भूमिका को कम करने के विकल्पों पर चर्चा करते रहे हैं। अब क्रॉस-बॉर्डर भुगतान को आसान बनाने के लिए डिजिटल करेंसी आधारित व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है।
2024 में BRICS देशों के बीच करीब 1.17 लाख करोड़ डॉलर का व्यापार हुआ था। वहीं, कुल वैश्विक निर्यात में BRICS देशों की हिस्सेदारी लगभग 24 प्रतिशत बताई जाती है। ऐसे में अगर समूह के सदस्य देशों के बीच भुगतान व्यवस्था मजबूत होती है, तो इसका असर वैश्विक वित्तीय व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
भारत ने रखा डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल का प्रस्ताव
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत BRICS के सदस्य देशों के बीच केंद्रीय बैंकों द्वारा जारी डिजिटल करेंसी (CBDC) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की वकालत कर सकता है। इसका उद्देश्य अलग-अलग देशों की डिजिटल भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़कर सीमा पार लेनदेन को अधिक आसान और तेज बनाना है।
भारत, चीन और रूस समेत BRICS के कई देश अपने-अपने डिजिटल भुगतान और डिजिटल करेंसी सिस्टम विकसित कर रहे हैं। ऐसे में इन प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है।
क्या डॉलर की जगह लेगा BRICS का पेमेंट सिस्टम?
BRICS के डिजिटल पेमेंट प्लान को सीधे तौर पर डॉलर की जगह लेने वाली नई मुद्रा कहना अभी जल्दबाजी होगी। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं और डिजिटल भुगतान प्रणालियों के जरिए व्यापार को आसान बनाना है।
अगर BRICS देश आपसी व्यापार में डॉलर की जरूरत कम करने में सफल होते हैं, तो इससे अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कुछ हद तक घट सकती है। हालांकि, वैश्विक व्यापार और वित्तीय बाजारों में डॉलर की मौजूदा मजबूत स्थिति को देखते हुए उसके विकल्प के रूप में किसी नई व्यवस्था को स्थापित करना एक लंबी प्रक्रिया होगी।
भारत के लिए क्यों अहम है यह योजना?
भारत के लिए यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे दूसरे BRICS देशों के साथ व्यापार में भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाने की संभावना है। डिजिटल करेंसी और आधुनिक भुगतान प्रणालियों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ने से सीमा पार भुगतान में लगने वाला समय और लागत कम हो सकती है।
इसके अलावा, भारत अपनी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल भुगतान क्षमता को वैश्विक स्तर पर पेश करने का अवसर भी हासिल कर सकता है।
अमेरिका की नजर भी BRICS पर
BRICS के भीतर डॉलर पर निर्भरता घटाने की चर्चा अमेरिका के लिए संवेदनशील मुद्दा रही है। अमेरिकी अधिकारियों और नीति निर्माताओं की ओर से समय-समय पर BRICS की ऐसी पहलों को लेकर चिंता जताई जाती रही है।
हालांकि, BRICS की ओर से प्रस्तावित डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को फिलहाल डॉलर के तत्काल विकल्प के बजाय सदस्य देशों के बीच भुगतान को अधिक सुविधाजनक बनाने की पहल के रूप में देखना ज्यादा सही होगा।
BRICS में बढ़ रहा आर्थिक प्रभाव
BRICS के विस्तार के बाद समूह का वैश्विक आर्थिक और व्यापारिक महत्व और बढ़ा है। भारत, चीन और रूस जैसे बड़े देशों के साथ कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भागीदारी ने इसे वैश्विक आर्थिक मंच पर महत्वपूर्ण बना दिया है।
ऐसे में भारत की अध्यक्षता में होने वाले शिखर सम्मेलन में क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और डिजिटल करेंसी जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन सकते हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या BRICS वास्तव में डॉलर पर अपनी निर्भरता को बड़े स्तर पर कम कर पाएगा। आने वाले समय में सदस्य देशों के बीच डिजिटल भुगतान व्यवस्था कितनी मजबूत होती है, यह इस दिशा में सबसे अहम संकेत होगा।
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