गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां शुरू, जानें गणेश चतुर्थी पर कौन से रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है और पूजा के बाद किन प्रसादों का भोग लगाया जाता है
Ganesh Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकारी देवता माना जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन उनकी पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आने की मान्यता है।
गणपति उत्सव के दौरान घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। भक्त सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा की तैयारी करते हैं और भगवान गणेश को प्रिय मानी जाने वाली वस्तुओं का भोग लगाते हैं।
गणेश चतुर्थी पर क्या पहनें?
गणेश चतुर्थी के दिन पूजा के लिए स्वच्छ और पारंपरिक वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। पुरुष कुर्ता-पायजामा, धोती-कुर्ता या अन्य पारंपरिक परिधान पहन सकते हैं। महिलाएं साड़ी, सलवार-कुर्ता या अन्य पारंपरिक पोशाक पहन सकती हैं।
धार्मिक मान्यताओं में लाल, पीला, नारंगी और हरा जैसे रंग शुभ माने जाते हैं। पूजा के समय साफ-सुथरे कपड़े पहनना और सात्विक भाव से भगवान गणेश की आराधना करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
गणेश जी को क्या चढ़ाएं?
भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा घास और मोदक का विशेष महत्व बताया गया है। इसके अलावा लड्डू, फल, फूल और नारियल आदि भी अर्पित किए जाते हैं। गणपति बप्पा को मोदक प्रिय माने जाते हैं, इसलिए भक्त उन्हें मोदक का भोग लगाते हैं।
गणेश चतुर्थी पर क्या खाएं?
गणेश चतुर्थी पर कई लोग व्रत रखते हैं। व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन खा सकते हैं।
वहीं, जो लोग व्रत नहीं रखते, वे सात्विक भोजन कर सकते हैं। भोजन में मौसमी फल, सब्जियां, दाल, चावल, रोटी और घर में बने हल्के व्यंजन शामिल किए जा सकते हैं। पूजा और व्रत के दौरान खान-पान अपनी पारिवारिक परंपरा और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के अनुसार रखना बेहतर है।
पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करने से पहले पूजा स्थल को साफ कर लें। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा को विधि-विधान से स्थापित कर पूजा करें। पूजा में दीपक, धूप, फूल, दूर्वा, फल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। अंत में गणेश जी की आरती कर परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण किया जाता है।
गणेश चतुर्थी केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि परिवार और समाज के साथ मिलकर उत्सव मनाने का अवसर भी है। इस दौरान स्वच्छता, पर्यावरण और सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए।






