जयराम रमेश ने चीन नीति पर मांगा जवाब, लद्दाख-अरुणाचल, ऑपरेशन सिंदूर और 112.6 अरब डॉलर के व्यापार घाटे को लेकर उठाए सवाल
BRICS Summit 2026: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार की चीन नीति पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चार प्रमुख सवाल पूछते हुए भारत-चीन संबंधों को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।
मोदी और शी जिनपिंग की बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से आगे बढ़ाने तथा मतभेदों को विवाद में न बदलने पर जोर दिया। भारत की ओर से सीमा पर शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
1. गलवान के बाद 2020 के बयान पर सवाल
जयराम रमेश ने 19 जून 2020 को हुई सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का हवाला देते हुए पूछा कि क्या उस बयान से चीन के साथ बातचीत में भारत की स्थिति कमजोर हुई। कांग्रेस नेता ने गलवान घाटी में 15-16 जून 2020 को हुई हिंसक झड़प और भारतीय सैनिकों की शहादत का जिक्र करते हुए सरकार से इस मुद्दे पर जवाब मांगा।
कांग्रेस का आरोप है कि उस समय के बयान को वापस नहीं लिया गया और इसका असर बाद की बातचीत में भारत की स्थिति पर पड़ा।
2. लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश को लेकर सरकार से जवाब
कांग्रेस ने लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में चीन से जुड़े सीमा विवाद पर भी सरकार को घेरा। रमेश ने आरोप लगाया कि पूर्वी लद्दाख के कुछ हिस्सों में भारत के पारंपरिक गश्त और चराई के अधिकार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में चीन के दावों और वहां स्थानों के नाम बदलने जैसी गतिविधियों का भी मुद्दा उठाया।
हालांकि, ये कांग्रेस द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं और सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
3. ऑपरेशन सिंदूर और चीन-पाकिस्तान संबंधों पर सवाल
कांग्रेस ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन की कथित भूमिका को लेकर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। जयराम रमेश ने सैन्य अधिकारियों के अलग-अलग समय पर दिए गए बयानों का हवाला देते हुए पूछा कि क्या शी जिनपिंग से मुलाकात से पहले चीन को लेकर भारत की रणनीतिक स्थिति में कोई बदलाव किया गया।
कांग्रेस ने विशेष रूप से चीन के पाकिस्तान के साथ संबंध और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसकी कथित भूमिका को लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठाया है।
4. चीन के साथ रिकॉर्ड व्यापार घाटा
कांग्रेस का चौथा सवाल आर्थिक मोर्चे से जुड़ा है। जयराम रमेश ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 112.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। उन्होंने चीन से महत्वपूर्ण कच्चे माल, औद्योगिक घटकों और अन्य इनपुट पर बढ़ती निर्भरता को लेकर सरकार से स्पष्ट रोडमैप मांगा।
वहीं, विदेश मंत्रालय के मुताबिक मोदी और शी ने आर्थिक संबंधों में संरचनात्मक व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। दोनों पक्षों ने सीमा विवाद के समाधान के लिए निष्पक्ष और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य रास्ते पर आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता जताई।
कांग्रेस ने मांगा स्पष्ट जवाब
कांग्रेस का कहना है कि चीन के साथ संबंधों को सामान्य बनाना अलग बात है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा विवाद और आर्थिक निर्भरता जैसे मुद्दों पर सरकार को देश के सामने अपनी रणनीति स्पष्ट करनी चाहिए। जयराम रमेश ने मोदी सरकार की चीन नीति को लेकर तीखी राजनीतिक टिप्पणी करते हुए इसे “calibrated capitulation” करार दिया।
इस तरह मोदी-शी बैठक के बाद भारत-चीन संबंधों को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। एक ओर सरकार दोनों देशों के बीच संवाद, सीमा पर शांति और आर्थिक संबंधों में सुधार की बात कर रही है, वहीं कांग्रेस राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापार घाटे जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रही है।
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