Wednesday, September 16, 2026
HomeTravelRameswaram Temple History: भगवान राम से जुड़ा है रामेश्वरम मंदिर का इतिहास,...

Rameswaram Temple History: भगवान राम से जुड़ा है रामेश्वरम मंदिर का इतिहास, 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है यह धाम

Rameswaram Temple History: तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप पर स्थित श्री रामनाथस्वामी मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक है। समुद्र के किनारे स्थित यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपनी विशाल वास्तुकला और लंबे गलियारों के लिए भी पूरी दुनिया में जाना जाता है। मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसे हिंदू धर्म के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल माना जाता है। रामेश्वरम चार धाम तीर्थों में भी प्रमुख स्थान रखता है।

भगवान राम से जुड़ी है मंदिर की पौराणिक कहानी

रामेश्वरम मंदिर की सबसे प्रसिद्ध मान्यता रामायण से जुड़ी है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद यहां भगवान शिव की पूजा की थी। मान्यता है कि युद्ध में रावण का वध करने के बाद भगवान राम ने शिव की आराधना कर प्रायश्चित किया था।

कहा जाता है कि भगवान राम ने हनुमान को काशी से शिवलिंग लाने के लिए भेजा था। हनुमान के वापस आने में देर हुई तो माता सीता ने रेत से शिवलिंग बनाया और भगवान राम ने उसी की पूजा की। इसी शिवलिंग को रामलिंग या रामनाथस्वामी से जोड़ा जाता है। बाद में हनुमान काशी से शिवलिंग लेकर पहुंचे, जिसे भी मंदिर में स्थापित किया गया।

हालांकि यह कथा धार्मिक परंपरा और मान्यता का हिस्सा है, मंदिर का इतिहास इससे कहीं अधिक व्यापक है।

12वीं सदी से जुड़ा मंदिर का इतिहास

आधिकारिक मंदिर इतिहास के अनुसार, यह तीर्थ 10वीं सदी तक एक साधु की देखरेख में था। इसके बाद 12वीं सदी में श्रीलंका के राजा पराक्रमबाहु ने मंदिर के गर्भगृह का निर्माण कराया। बाद की सदियों में रामनाथपुरम के शासकों और अन्य दानदाताओं ने मंदिर के विभिन्न हिस्सों का निर्माण और विस्तार कराया।

रामेश्वरम नगर के इतिहास में चोल, पांड्य, जाफना और बाद में सेतुपति शासकों का भी उल्लेख मिलता है। विशेष रूप से सेतुपति शासकों ने मंदिर के विस्तार और निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

1,212 खंभों वाला विशाल गलियारा

रामनाथस्वामी मंदिर की सबसे बड़ी पहचान इसके विशाल गलियारे हैं। मंदिर के गलियारों में बड़ी संख्या में नक्काशीदार स्तंभ हैं। सरकारी पर्यटन स्रोत के अनुसार मंदिर में 1,212 स्तंभों वाला प्रसिद्ध गलियारा है। इसका तीसरा गलियारा लगभग 197 मीटर पूर्व-पश्चिम और 133 मीटर उत्तर-दक्षिण तक फैला हुआ है।

हर स्तंभ पर की गई नक्काशी मंदिर की वास्तुकला को खास बनाती है। यही वजह है कि रामेश्वरम मंदिर धार्मिक स्थल होने के साथ-साथ दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला का भी शानदार उदाहरण माना जाता है।

मंदिर में हैं 22 पवित्र तीर्थ

रामेश्वरम मंदिर की धार्मिक परंपरा में 22 तीर्थों का विशेष महत्व है। श्रद्धालु मंदिर दर्शन से पहले इन पवित्र जलस्रोतों में स्नान करने की परंपरा का पालन करते हैं। मंदिर परिसर और रामेश्वरम क्षेत्र में कई अन्य तीर्थ भी हैं।

मंदिर के सामने समुद्र तट पर स्थित अग्नि तीर्थ भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां स्नान करना पुण्यकारी माना जाता है।

रामेश्वरम क्यों है इतना खास?

रामेश्वरम की खासियत केवल रामनाथस्वामी मंदिर तक सीमित नहीं है। यह स्थान भगवान राम की कथा, शिव भक्ति और समुद्र से जुड़ी धार्मिक परंपराओं का संगम माना जाता है। यही कारण है कि यहां देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

रामेश्वरम को चार धाम में शामिल किया जाता है और रामनाथस्वामी मंदिर को 12 ज्योतिर्लिंगों में एक माना जाता है। इस वजह से हिंदू तीर्थयात्रा में इसका विशेष स्थान है।

इतिहास और आस्था का अनोखा संगम

रामनाथस्वामी मंदिर की पहचान उसकी पौराणिक कथाओं, सदियों पुराने इतिहास और भव्य वास्तुकला के मेल से बनी है। एक तरफ यहां भगवान राम और शिव से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं हैं, तो दूसरी ओर चोल, पांड्य, जाफना और सेतुपति शासकों के दौर में विकसित हुई स्थापत्य परंपरा दिखाई देती है।

आज भी रामेश्वरम भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिना जाता है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर दर्शन आध्यात्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Rameswaram Temple History: एक नजर में

  • स्थान: रामेश्वरम, तमिलनाडु
  • मुख्य देवता: भगवान शिव, रामनाथस्वामी
  • धार्मिक महत्व: 12 ज्योतिर्लिंगों में एक
  • चार धाम: रामेश्वरम प्रमुख चार धाम तीर्थों में शामिल
  • प्रमुख मान्यता: भगवान राम द्वारा शिव पूजा से जुड़ी कथा
  • प्रमुख वास्तु विशेषता: विशाल नक्काशीदार गलियारे
  • पवित्र तीर्थ: मंदिर में 22 प्रमुख तीर्थ
  • ऐतिहासिक विकास: 12वीं सदी से मंदिर के निर्माण और विस्तार के प्रमाण
  • प्रमुख शासक योगदान: पांड्य, जाफना और सेतुपति शासकों का योगदान

READ MORE- यूपी 2027: अखिलेश यादव की नई रणनीति, अब 75 जिलों के लिए 75 अलग घोषणा-पत्र तैयार करेगी सपा

Himanshu Dubey
Himanshu Dubeyhttps://nation9network.com
हिमांशु दुबे पूर्वांचल की मिट्टी और अवध की तहज़ीब से निकलकर दिल्ली के दिल तक का सफ़र—जहाँ शब्दों ने पहचान दी और पत्रकारिता ने दिशा तय की।मीडिया और समाज को करीब से समझने की जिज्ञासा मुझे जामिया मिल्लिया इस्लामिया तक ले गई, जहाँ मैंने मास मीडिया का अध्ययन किया। वर्तमान में मैं भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) का छात्र हूँ और पत्रकारिता को सिर्फ़ एक पेशे के रूप में नहीं, बल्कि समाज को देखने, समझने और उसके सवालों को सामने लाने के माध्यम के रूप में देखता हूँ। आज़मगढ़ | लखनऊ | दिल्ली | जम्मू 📍 मैं समाज, राजनीति, ज़मीनी सरोकार के साथ वर्तमान में समसामयिक विषयों पर लिखता हूँ इसके साथ ही टेक्नोलॉजी, डिफेंस, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, देश और लाइफस्टाइल से जुड़ी खबरों को सरल और सहज भाषा में पाठकों तक पहुंचाना मेरी लेखन शैली और विवेक की प्राथमिकता है। संपर्क: ✉️ iamhimanshu032@gmail.com
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post