Monday, September 7, 2026
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100 साल पुराने हिंदू मंदिर पर घिरा पाकिस्तान, सहारनपुर मस्जिद मामले में निकाली खीझ; विदेश मंत्रालय ने जताई आपत्ति

सहारनपुर मस्जिद विवाद: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में सरकारी जमीन पर बनी एक पुरानी मस्जिद को हटाए जाने के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। मस्जिद पर हुई कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान ने इसे धार्मिक स्थल के खिलाफ कार्रवाई बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस मामले की ओर खींचने की अपील की है।

अदालत के आदेश के बाद हुई कार्रवाई

सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को प्रशासन ने 5 सितंबर की सुबह हटाया। अधिकारियों के मुताबिक यह ढांचा सरकारी जमीन पर अनधिकृत रूप से बना था और इसे हटाने से संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई थी। स्थानीय अदालत ने मस्जिद प्रबंधन की अपील खारिज किए जाने के बाद कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ। प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था भी की थी।

मस्जिद प्रबंधन की ओर से हालांकि कार्रवाई की प्रक्रिया और समय को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।

पाकिस्तान ने क्या कहा?

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने को लेकर इसे ऐतिहासिक इस्लामिक धार्मिक स्थल के खिलाफ कार्रवाई बताया। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भारत में इस्लामी विरासत को मिटाने की कोशिश की जा रही है। बयान में पाकिस्तान ने 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस का भी संदर्भ दिया।

पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मामले का संज्ञान लेने की अपील की है और भारत में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

पाकिस्तान में 100 साल पुराने हिंदू मंदिर को लेकर भी विवाद

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब उसके पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले में 100 साल से अधिक पुराने हिंदू मंदिर के ढहाए जाने को लेकर विवाद चल रहा है। अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों ने मंदिर को जानबूझकर गिराए जाने का आरोप लगाया है, जबकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने भारी बारिश के कारण ढांचा गिरने की बात कही है। इस मामले में जांच और मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग भी उठी है।

भारत ने भी पाकिस्तान में मंदिर से जुड़ी घटना पर चिंता जताते हुए जांच की मांग की थी।

सहारनपुर में अब मिला गहरा कुआं

मस्जिद के मलबे को हटाने के बाद घटनास्थल पर एक गहरा कुआं मिलने की खबर ने भी मामले को चर्चा में ला दिया है। रिपोर्टों के अनुसार कुएं की ऐतिहासिकता और उसके संबंध में आगे जांच की जा रही है।

फिलहाल सहारनपुर में प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। मस्जिद हटाने की कार्रवाई की कानूनी प्रक्रिया और इसके बाद सामने आई राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के कारण यह मामला उत्तर प्रदेश के साथ-साथ भारत-पाकिस्तान के बीच बयानबाजी का भी विषय बन गया है।

क्या है सहारनपुर मस्जिद का विवाद?

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर विवाद सरकारी जमीन पर उसके निर्माण और कब्जे की वैधता से जुड़ा है। प्रशासन के मुताबिक राजस्व रिकॉर्ड में जिस जमीन पर यह ढांचा बना था, वह सरकारी जमीन के रूप में दर्ज है। इसी आधार पर मस्जिद को अनधिकृत निर्माण बताते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

जुलाई में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत का आदेश

मामले में जुलाई 2026 में सहारनपुर के सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने फैसला सुनाया। अदालत ने जमीन को सरकारी संपत्ति माना और मस्जिद के निर्माण को सरकारी जमीन पर अनधिकृत कब्जे के दायरे में रखा। रिपोर्टों के मुताबिक आदेश में करीब 315 वर्ग मीटर जमीन पर कथित अनधिकृत कब्जे के लिए लगभग 6.41 करोड़ रुपये की वसूली का भी प्रावधान किया गया था।

अदालत ने परिसर खाली करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ मस्जिद प्रबंधन की ओर से अपील दायर की गई।

अपील भी हुई खारिज

मस्जिद प्रबंधन ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी। लेकिन 2 सितंबर 2026 को जिला अदालत ने अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन के लिए परिसर से कथित अनधिकृत निर्माण हटाने का रास्ता साफ हो गया।

इसके कुछ दिन बाद, 5 सितंबर की सुबह प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। अधिकारियों ने इसे अदालत के आदेश के अनुपालन में की गई कार्रवाई बताया।

मस्जिद प्रबंधन ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल

हालांकि मस्जिद के मुतवल्ली और प्रबंधन की ओर से प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। उनका दावा है कि मस्जिद काफी पुरानी थी और कार्रवाई से पहले उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत पर्याप्त अवसर नहीं मिला। मामले को आगे हाई कोर्ट में चुनौती देने की बात भी सामने आई है।

कार्रवाई के बाद राजनीतिक विवाद भी बढ़ा

मस्जिद गिराए जाने के बाद उत्तर प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। विपक्षी नेताओं ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे धार्मिक और राजनीतिक मुद्दा बताया, जबकि प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई सरकारी जमीन पर अनधिकृत निर्माण और अदालत के आदेश के आधार पर की गई।

इस पूरे मामले में अब सबसे अहम सवाल यही है कि सरकारी जमीन पर धार्मिक ढांचे की वैधता और उसे हटाने की प्रशासनिक प्रक्रिया कानून के मुताबिक किस तरह लागू हुई। इसी को लेकर अदालतों में आगे भी कानूनी लड़ाई जारी रहने की संभावना है।

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Himanshu Dubey
Himanshu Dubeyhttps://nation9network.com
मैं हिमांशु दुबे पूर्वांचल की मिट्टी और अवध की तहज़ीब से निकलकर दिल्ली के दिल तक का सफ़र—जहाँ शब्दों ने मुझे पहचान दी और पत्रकारिता ने मेरी दिशा तय की। मीडिया और समाज को करीब से समझने की जिज्ञासा मुझे जामिया मिल्लिया इस्लामिया तक ले गई, जहाँ मैंने मास मीडिया का अध्ययन किया। वर्तमान में मैं भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) का छात्र हूँ और पत्रकारिता को एक पेशे के साथ-साथ समाज को देखने और समझने का माध्यम मानता हूँ। आज़मगढ़ | लखनऊ | दिल्ली | जम्मू 📍 समाज, राजनीति, संस्कृति और ज़मीनी सरोकारों से जुड़े सवालों को समझना और उन्हें अपनी भाषा में सामने रखना मेरी निरंतर कोशिश है। संपर्क: ✉️ iamhimanshu032@gmail.com
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