लखनऊ: कभी वायु प्रदूषण और खराब एयर क्वालिटी को लेकर चर्चा में रहने वाला लखनऊ अब स्वच्छ हवा की दिशा में अपनी तस्वीर बदलता नजर आ रहा है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में लखनऊ ने पहला स्थान हासिल किया है। केंद्रीय पर्यावरण विभाग की ओर से जारी सर्वेक्षण में इंदौर दूसरे और जबलपुर तीसरे स्थान पर रहे।
लखनऊ की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले साल शहर इस श्रेणी में 15वें स्थान पर था। महज एक साल में 14 पायदान की छलांग ने शहर की स्वच्छ वायु को लेकर किए जा रहे प्रयासों को नई पहचान दी है।
प्रदूषण से मुकाबले में बदली तस्वीर
बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या और निर्माण कार्यों के बीच किसी बड़े शहर में हवा को साफ रखना आसान चुनौती नहीं है। ऐसे में लखनऊ का शीर्ष स्थान हासिल करना शहर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सर्वेक्षण में शहरों के स्वच्छ वायु प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रयासों का आकलन किया गया।
लखनऊ के साथ ही मध्य प्रदेश के इंदौर और जबलपुर ने भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए शीर्ष तीन में जगह बनाई। इंदौर लंबे समय से स्वच्छता के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुका है, जबकि अब स्वच्छ हवा के मोर्चे पर भी उसका प्रदर्शन चर्चा में है।
15वें स्थान से नंबर-1 तक का सफर
लखनऊ की सबसे बड़ी कहानी उसकी रैंकिंग में आया बदलाव है। पिछले वर्ष 15वें स्थान पर रहने वाला शहर इस बार सीधे पहले पायदान पर पहुंच गया। यह बदलाव बताता है कि वायु प्रदूषण जैसी चुनौती से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयासों का असर दिखाई दे सकता है।
हालांकि, नंबर-1 की यह उपलब्धि अपने साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आती है। लखनऊ के सामने अब इस प्रदर्शन को बनाए रखने और हवा की गुणवत्ता में लगातार सुधार करने की चुनौती होगी।
उपलब्धि के साथ चुनौती भी
स्वच्छ हवा केवल किसी सर्वेक्षण की रैंकिंग तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध शहर में रहने वाले लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और स्वास्थ्य से है। इसलिए लखनऊ की इस उपलब्धि को एक शुरुआत के तौर पर देखा जा सकता है।
शहर के सामने अब अगली चुनौती यह होगी कि वह स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में मिली पहली पायदान को बरकरार रखते हुए प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को लगातार मजबूत करे। अगर ऐसा होता है, तो लखनऊ की यह छलांग देश के दूसरे बड़े शहरों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है।
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