ICMR Study: ICMR की नई स्टडी ने भारत में एंटीबायोटिक के इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता सामने रखी है। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं लेना और बीमारी के लक्षण कम होते ही दवा का कोर्स रोक देना Antibiotic Resistance के खतरे को बढ़ा सकता है। इसका मतलब है कि कुछ बैक्टीरिया समय के साथ उन दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं, जिनसे पहले उनका इलाज किया जा सकता था।
एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल बढ़ा सकता है खतरा
एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरियल इंफेक्शन के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन हर बीमारी में इनकी जरूरत नहीं होती। खासकर वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक प्रभावी नहीं होतीं। इसके बावजूद बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक लेना एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है।
दवा का गलत इस्तेमाल, अनावश्यक एंटीबायोटिक लेना या डॉक्टर द्वारा निर्धारित अवधि से पहले उपचार रोक देना बैक्टीरिया में दवा के खिलाफ प्रतिरोध विकसित होने की संभावना बढ़ा सकता है।
20 बड़े अस्पतालों में हुआ अध्ययन
ICMR से जुड़ी हालिया रिपोर्ट में देश के 20 बड़े अस्पतालों में 1.6 लाख से अधिक मरीजों से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया गया। रिपोर्ट में गंभीर संक्रमणों और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की चुनौती को लेकर चिंता सामने आई है।
रेजिस्टेंट बैक्टीरिया के कारण कुछ संक्रमणों का इलाज पहले की तुलना में मुश्किल हो सकता है। गंभीर मामलों में मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ सकता है और इलाज के विकल्प भी सीमित हो सकते हैं।
Bloodstream Infection में बढ़ सकता है जोखिम
Antibiotic-resistant bacteria से होने वाले गंभीर संक्रमण विशेष रूप से चिंता का विषय हैं। जब संक्रमण खून में फैल जाता है, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे मामलों में प्रभावी एंटीबायोटिक उपलब्ध होना इलाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।
स्टडी में कुछ रेजिस्टेंट इंफेक्शन से जुड़े मामलों में मृत्यु के जोखिम में 39 से 51 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की बात सामने आई है। हालांकि, इस तरह के आंकड़ों को संक्रमण के प्रकार, मरीज की स्थिति और अन्य चिकित्सकीय कारकों के संदर्भ में समझना जरूरी है।
अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण भी जरूरी
Antibiotic Resistance से निपटने के लिए सिर्फ दवाओं के इस्तेमाल को नियंत्रित करना ही पर्याप्त नहीं है। अस्पतालों में Infection Prevention and Control यानी संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण की मजबूत व्यवस्था भी जरूरी है।
अस्पतालों में स्वच्छता, हाथों की सफाई, संक्रमण की समय पर पहचान और संक्रमित मरीजों को उचित तरीके से संभालना रेजिस्टेंट इंफेक्शन के प्रसार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मरीजों पर बढ़ सकता है आर्थिक बोझ
रेजिस्टेंट संक्रमण का असर केवल स्वास्थ्य पर ही नहीं पड़ता, बल्कि मरीज और उसके परिवार पर आर्थिक दबाव भी बढ़ सकता है। लंबे समय तक इलाज, अतिरिक्त जांच, अस्पताल में अधिक दिन रहने और महंगी दवाओं की जरूरत पड़ने से उपचार का खर्च बढ़ सकता है।
डॉक्टर की सलाह के बिना न लें एंटीबायोटिक
विशेषज्ञों की सामान्य सलाह है कि एंटीबायोटिक का इस्तेमाल डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य पेशेवर की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए। मरीजों को अपनी तरफ से दवा शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवा, खुराक और अवधि का पालन करना जरूरी है।
ध्यान रखें: एंटीबायोटिक को लेकर व्यक्तिगत निर्णय लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। इससे अनावश्यक दवा के इस्तेमाल और Antibiotic Resistance के बढ़ते खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
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