पत्नी और दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या के बाद बच्चों को लेकर कमरे में बंद हो गया था अरविंद, करीब सात घंटे चला ऑपरेशन; एटीएस कमांडो ने संभाला मोर्चा
AzamgarhMurder : उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार शाम हुई सनसनीखेज वारदात का अंत बुधवार तड़के पुलिस कार्रवाई के साथ हुआ। अरविंद सिंह पर अपनी पत्नी बबीता सिंह और पूजा कराने आए दो पुजारियों—महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा—की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है। वारदात के बाद वह अपने बच्चों के साथ घर के एक कमरे में बंद हो गया। पुलिस ने कई घंटे तक उसे आत्मसमर्पण के लिए समझाया, लेकिन वह बाहर नहीं आया। बाद में पुलिस और एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में अरविंद को गोली लगी और उसकी मौत हो गई। उसके घायल बेटे की भी बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई।
पूजा को लेकर शुरू हुआ विवाद
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अरविंद मंगलवार शाम करीब छह बजे घर लौटा था। उस समय घर में उसकी पत्नी बबीता धार्मिक अनुष्ठान करा रही थी। पूजा में दो पुजारी महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा समेत अन्य लोग मौजूद थे। शुरुआती जांच के अनुसार, अरविंद ने पूजा को लेकर सवाल किए और पुजारियों से आधार कार्ड मांगने की बात भी सामने आई है। इसी दौरान विवाद बढ़ गया।
पुलिस के मुताबिक, विवाद बढ़ने के बाद अरविंद ने कथित तौर पर लाइसेंसी हथियार से फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से उसकी पत्नी बबीता और दोनों पुजारियों की मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर मौजूद अन्य लोग वहां से निकल गए।
तीन बच्चों के साथ कमरे में बंद हो गया आरोपी
तीन लोगों की हत्या के बाद अरविंद अपने बच्चों को लेकर घर के अंदर एक कमरे में चला गया और खुद को बंद कर लिया। पुलिस के मुताबिक, उसके साथ तीन बच्चे थे। इसके बाद पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बातचीत तथा आत्मसमर्पण के प्रयास शुरू किए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। करीब सात घंटे तक पुलिस की ओर से अरविंद को समझाने और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास किए गए।
पुलिस की चेतावनी के बावजूद नहीं माना
अधिकारियों के मुताबिक, अरविंद को बार-बार आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया। पुलिस की प्राथमिकता कमरे में मौजूद बच्चों को सुरक्षित निकालना थी। इसके बावजूद आरोपी बाहर नहीं आया। बाद में स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब कमरे के भीतर से फायरिंग की आवाज सुनाई दी।
इसके बाद एसओजी और एटीएस की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन शुरू किया। रिपोर्टों के अनुसार, कमांडो टीम ने दरवाजा खोलने के लिए स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस का इस्तेमाल किया और कमरे में प्रवेश किया। पुलिस के मुताबिक, अरविंद ने टीम पर कई राउंड फायर किए। जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई।
आरोपी की मौत, घायल बेटे ने भी दम तोड़ा
पुलिस कार्रवाई में अरविंद घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। इस कार्रवाई के दौरान उसका बेटा भी गोली लगने से घायल हुआ। अस्पताल में इलाज के दौरान बच्चे ने भी दम तोड़ दिया। दो अन्य बच्चों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाला।
आजमगढ़ पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहे हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि विवाद की वास्तविक शुरुआत किस बात से हुई और फायरिंग के पूरे घटनाक्रम में कौन-कौन लोग मौजूद थे। मामले में घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर आगे की जांच जारी है।






