Wednesday, September 23, 2026
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प्रदूषण के दौरान वर्कआउट करें या न करें? स्टडी में सामने आई चौंकाने वाली बात

प्रदूषित हवा में एक्सरसाइज करने से जोखिम बढ़ सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में कसरत से मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ नुकसान से ज्यादा; दिल्ली जैसे बेहद प्रदूषित शहरों में अतिरिक्त सावधानी जरूरी

HealthNews: बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच अक्सर यह सवाल उठता है कि सुबह की सैर, दौड़ना या साइकिल चलाना जारी रखना चाहिए या प्रदूषण के कारण आउटडोर वर्कआउट से बचना चाहिए। BBC की एक रिपोर्ट में प्रकाशित शोध और विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि सामान्य परिस्थितियों में व्यायाम से मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ वायु प्रदूषण के नुकसान से अधिक हो सकते हैं। हालांकि, प्रदूषण का स्तर बहुत अधिक होने पर तस्वीर बदल सकती है।

कसरत करते समय शरीर में ज्यादा प्रदूषित हवा पहुंचती है

दौड़ने, साइकिल चलाने या तेज गति से व्यायाम करने के दौरान व्यक्ति सामान्य स्थिति की तुलना में ज्यादा तेजी और गहराई से सांस लेता है। ऐसे में शरीर के अंदर प्रदूषित हवा और उसमें मौजूद कणों की मात्रा भी बढ़ सकती है।

शोध की समीक्षा के अनुसार, समान दूरी तय करते समय ज्यादा तीव्रता से व्यायाम करने पर व्यक्ति अधिक हवा और प्रदूषक कणों को सांस के जरिए अंदर ले सकता है। इसलिए व्यस्त ट्रैफिक वाली सड़कों पर तेज दौड़ या साइकिलिंग के दौरान प्रदूषण का संपर्क बढ़ सकता है।

फिर भी व्यायाम छोड़ना जरूरी नहीं

BBC की रिपोर्ट में पर्यावरण और स्वास्थ्य शोधकर्ता एलेन डी नजेल के हवाले से बताया गया है कि प्रदूषित शहरों में भी शारीरिक गतिविधि से मिलने वाले लाभ आम तौर पर प्रदूषण के जोखिम से अधिक होते हैं।

2016 के एक मॉडलिंग अध्ययन में पैदल चलने और साइकिल चलाने से होने वाले स्वास्थ्य लाभ तथा वायु प्रदूषण के जोखिम की तुलना की गई थी। इसके मुताबिक, ज्यादातर प्रदूषण स्तरों पर सक्रिय रहने से होने वाले फायदे प्रदूषण से होने वाले नुकसान से अधिक रहे। हालांकि, बेहद ज्यादा प्रदूषण और लंबे समय तक एक्सरसाइज की स्थिति में जोखिम फायदे के करीब पहुंच सकता है या उसे पार कर सकता है।

प्रदूषित हवा में भी एक्सरसाइज से मौत का जोखिम कम

हाल की एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में शारीरिक गतिविधि और वायु प्रदूषण के संयुक्त प्रभावों का अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि प्रदूषित वातावरण में शारीरिक गतिविधि करने वालों में निष्क्रिय रहने वालों की तुलना में मृत्यु जोखिम में करीब 26 प्रतिशत कमी देखी गई। वहीं, अपेक्षाकृत साफ हवा में व्यायाम करने वालों में यह कमी करीब 31 प्रतिशत थी। शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि उपलब्ध अध्ययनों से प्रदूषण और व्यायाम की मात्रा के बीच स्पष्ट डोज-रिस्पॉन्स संबंध स्थापित नहीं किया जा सका है।

इसका मतलब यह नहीं है कि प्रदूषण में एक्सरसाइज करना सुरक्षित है। बल्कि निष्कर्ष यह है कि प्रदूषण के बावजूद शारीरिक गतिविधि से मिलने वाले कई स्वास्थ्य लाभ बने रहते हैं।

दिल्ली जैसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में सावधानी ज्यादा जरूरी

रिपोर्ट के मुताबिक, जब प्रदूषण का स्तर बेहद ज्यादा हो जाता है, तो लंबे समय तक बाहर रहकर एक्सरसाइज करने का जोखिम बढ़ सकता है। खासकर दुनिया के अत्यधिक प्रदूषित शहरों में यह चिंता ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है।

इसलिए ऐसे दिनों में आउटडोर वर्कआउट की तीव्रता और अवधि कम करना या अपेक्षाकृत साफ जगह चुनना उपयोगी हो सकता है।

ट्रैफिक से दूर जगह चुनने से घट सकता है प्रदूषण का संपर्क

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर बाहर एक्सरसाइज करनी है तो व्यस्त सड़कों और भारी ट्रैफिक वाले इलाकों से दूरी बनाना बेहतर है। BBC की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारी ट्रैफिक वाली सड़क से केवल एक-दो गलियां दूर जाने पर प्रदूषण के संपर्क में करीब 20 से 30 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।

इसलिए पार्क, हरित क्षेत्र या कम ट्रैफिक वाली सड़क को रनिंग और साइकिलिंग के लिए चुना जा सकता है।

अस्थमा और COPD वाले लोग रखें विशेष ध्यान

हर व्यक्ति पर प्रदूषण का असर एक जैसा नहीं होता। अस्थमा, COPD या अन्य सांस संबंधी समस्याओं वाले लोगों को प्रदूषित हवा में व्यायाम करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। समीक्षा में COPD वाले लोगों में प्रदूषण के संपर्क के बाद लक्षणों के बिगड़ने की बात सामने आई है।

इसके अलावा बहुत लंबे समय तक प्रदूषित हवा में व्यायाम करना भी जोखिम बढ़ा सकता है। एक हालिया व्यवस्थित समीक्षा में पाया गया कि WHO की वायु गुणवत्ता सीमा से ऊपर प्रदूषण वाले वातावरण में 120 मिनट या उससे अधिक के व्यायाम सत्रों के दौरान फेफड़ों की कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव की संभावना अधिक दिखी।

क्या करें?

  • बहुत व्यस्त ट्रैफिक वाली सड़क पर दौड़ने से बचें।
  • संभव हो तो पार्क या कम ट्रैफिक वाला रास्ता चुनें।
  • प्रदूषण बहुत अधिक होने पर आउटडोर वर्कआउट की अवधि और तीव्रता घटाएं।
  • लंबे समय तक लगातार बाहर व्यायाम करने से बचें।
  • अस्थमा, COPD या हृदय संबंधी बीमारी वाले लोग अपनी स्थिति के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लें।
  • प्रदूषण कम होने वाले समय में आउटडोर एक्सरसाइज करने पर विचार करें।
  • उपलब्ध शोध के मुताबिक, केवल वायु प्रदूषण के डर से शारीरिक गतिविधि पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है। लेकिन प्रदूषण जितना ज्यादा होगा, एक्सरसाइज की जगह, अवधि और तीव्रता को लेकर सावधानी उतनी ही जरूरी हो जाती है। साफ हवा में व्यायाम करना सबसे बेहतर विकल्प है।

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Himanshu Dubey
Himanshu Dubeyhttps://nation9network.com
हिमांशु दुबे पूर्वांचल की मिट्टी और अवध की तहज़ीब से निकलकर दिल्ली के दिल तक का सफ़र—जहाँ शब्दों ने पहचान दी और पत्रकारिता ने दिशा तय की।मीडिया और समाज को करीब से समझने की जिज्ञासा मुझे जामिया मिल्लिया इस्लामिया तक ले गई, जहाँ मैंने मास मीडिया का अध्ययन किया। वर्तमान में मैं भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) का छात्र हूँ और पत्रकारिता को सिर्फ़ एक पेशे के रूप में नहीं, बल्कि समाज को देखने, समझने और उसके सवालों को सामने लाने के माध्यम के रूप में देखता हूँ। आज़मगढ़ | लखनऊ | दिल्ली | जम्मू 📍 मैं समाज, राजनीति, ज़मीनी सरोकार के साथ वर्तमान में समसामयिक विषयों पर लिखता हूँ इसके साथ ही टेक्नोलॉजी, डिफेंस, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, देश और लाइफस्टाइल से जुड़ी खबरों को सरल और सहज भाषा में पाठकों तक पहुंचाना मेरी लेखन शैली और विवेक की प्राथमिकता है। संपर्क: ✉️ iamhimanshu032@gmail.com
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