औसत खुदरा भाव ₹55 के पार, कुछ बाजारों में ₹70-80 तक पहुंची कीमत; त्योहार से पहले बढ़ी चिंता
नई दिल्ली; देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। उपभोक्ता मामलों के विभाग के मुताबिक, देश में चीनी का औसत खुदरा भाव 20 जुलाई को करीब ₹48.18 प्रति किलो था, जो 20 अगस्त तक बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो हो गया। वहीं, कुछ शहरों और बाजारों में खुदरा कीमत इससे काफी अधिक पहुंच गई है और कहीं-कहीं ₹70 से ऊपर के भाव भी सामने आए हैं।
महंगाई की यह तेजी ऐसे समय में आई है, जब देश में त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है। रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, नवरात्र और दीपावली जैसे त्योहारों में मिठाइयों और दूसरे खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ती है। ऐसे में बढ़े हुए दाम सीधे आम परिवारों के बजट पर असर डाल रहे हैं।
आखिर क्यों बढ़ रही है चीनी की कीमत?
चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सरकार ने हालिया तेजी को मुख्य रूप से कम उत्पादन, सीमित उपलब्धता और बढ़ती मांग से जोड़ा है। पिछले साल कुछ प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में मौसम की स्थिति का भी उत्पादन पर असर पड़ा था।
बाजार में स्टॉक को लेकर चिंता और कारोबारियों की खरीदारी ने भी कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) का कहना है कि देश में वास्तविक चीनी की कमी नहीं है और मौजूदा तेजी में सट्टेबाजी और घबराहट में खरीदारी की भूमिका हो सकती है।
क्या एथेनॉल जिम्मेदार है?
चीनी महंगी होने के बाद एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने साफ किया है कि मौजूदा कीमत वृद्धि को केवल एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ना सही नहीं है। सरकार के मुताबिक, हालिया तेजी के पीछे दूसरे बाजार कारक ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
फिर कौन कमा रहा है मोटा मुनाफा?
चीनी की कीमत बढ़ने का फायदा हर किसान को सीधे नहीं मिल रहा है। उपभोक्ता बाजार में बढ़ी कीमत और किसान को मिलने वाले गन्ने के भुगतान के बीच कई स्तर होते हैं। चीनी मिल, थोक कारोबारी, स्टॉकिस्ट और खुदरा विक्रेता इस पूरी सप्लाई चेन का हिस्सा हैं।
यही वजह है कि जब बाजार में चीनी महंगी होती है तो यह सवाल उठता है कि बढ़ी कीमत का कितना हिस्सा किसान तक पहुंच रहा है और कितना हिस्सा कारोबार की अलग-अलग कड़ियों में रह जाता है। मौजूदा तेजी में कारोबारियों की जमाखोरी और सट्टेबाजी की आशंका पर भी चर्चा हो रही है।
सरकार ने उठाए कदम
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों को स्थिर करना है। यह कदम करीब एक दशक बाद उठाया गया है।
ISMA का कहना है कि देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सरकारी कदमों के बाद आने वाले दिनों में कीमतों में नरमी आ सकती है।
आम आदमी पर असर
चीनी के दाम बढ़ने का असर सिर्फ चाय और घर की रसोई तक सीमित नहीं है। मिठाई, बेकरी, चॉकलेट, पेय पदार्थ और कई दूसरे खाद्य उत्पादों की लागत भी प्रभावित हो सकती है। त्योहारों के मौसम में मिठाइयों की मांग बढ़ने के कारण इसका असर परिवारों के कुल खर्च पर दिखाई दे सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि चीनी की बढ़ती कीमत का फायदा वास्तव में किसान को मिल रहा है या बीच की सप्लाई चेन में किसी और की कमाई बढ़ रही है। आने वाले दिनों में सरकार की निगरानी और बाजार में चीनी की उपलब्धता इस सवाल का जवाब काफी हद तक तय करेगी।
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