डोगरा राजघराने का ऐतिहासिक महल, जहां आज भी दिखाई देती है जम्मू की समृद्ध संस्कृति और वास्तुकला
जम्मू: जम्मू शहर के पुराने हिस्से में स्थित मुबारक मंडी पैलेस डोगरा इतिहास और संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान है। कभी यह डोगरा शासकों का प्रमुख शाही निवास और सत्ता का केंद्र हुआ करता था। वर्ष 1925 में महाराजा हरि सिंह के हरि निवास पैलेस जाने के बाद भी मुबारक मंडी का राजनीतिक और ऐतिहासिक महत्व बना रहा।
मुबारक मंडी केवल एक महल नहीं, बल्कि कई महलों, इमारतों और आंगनों का विशाल परिसर है। यहां की वास्तुकला में मुगल, राजस्थानी, यूरोपीय और बारोक शैली का खूबसूरत मेल देखने को मिलता है। परिसर में शीश महल, रानी चरक महल, पिंक पैलेस, गोल घर और दरबार हॉल जैसे कई प्रमुख हिस्से शामिल हैं।
पिंक हॉल में कला का खजाना
मुबारक मंडी परिसर का पिंक हॉल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसी हिस्से में डोगरा आर्ट म्यूजियम स्थित है, जहां पहाड़ी कला परंपरा की कई दुर्लभ लघु चित्रकलाएं सुरक्षित हैं। संग्रह में जम्मू, कांगड़ा और बसोहली कला शैलियों के चित्र शामिल हैं। यहां मुगल बादशाह शाहजहां से जुड़ा सोने का मढ़ा धनुष-बाण और ऐतिहासिक पांडुलिपियां भी आकर्षण का केंद्र हैं।
इतिहास को समेटे खड़ा है परिसर
मुबारक मंडी ने जम्मू के राजसी इतिहास के कई दौर देखे हैं। आज यह परिसर जम्मू की विरासत, कला और स्थापत्य को समझने का महत्वपूर्ण स्थान है। सरकारी पर्यटन स्रोत भी इसे जम्मू के प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में शामिल करते हैं।
मुबारक मंडी की दीवारें केवल पुराने समय की कहानी नहीं कहतीं, बल्कि जम्मू की डोगरा संस्कृति, कला और शाही परंपरा को आने वाली पीढ़ियों से जोड़ने वाली विरासत भी हैं।
डोगरा शासकों का प्रमुख केंद्र
मुबारक मंडी लंबे समय तक डोगरा शासकों की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रही। यहां से शासन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए जाते थे और राजपरिवार के कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम भी इसी परिसर में आयोजित होते थे। वर्ष 1925 में महाराजा हरि सिंह के हरि निवास पैलेस जाने के बाद भी मुबारक मंडी का ऐतिहासिक महत्व बना रहा।
इस परिसर में पिंक पैलेस, शीश महल, रानी चरक महल, गोल घर और दरबार हॉल जैसे कई महत्वपूर्ण भवन शामिल हैं। प्रत्येक इमारत की अपनी अलग वास्तुकला और ऐतिहासिक कहानी है।
डोगरा कला का भी महत्वपूर्ण केंद्र
मुबारक मंडी का पिंक हॉल कला प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण रखता है। यहां डोगरा आर्ट म्यूजियम स्थित है, जिसमें जम्मू और आसपास के क्षेत्रों की समृद्ध कला परंपरा को देखा जा सकता है। संग्रहालय में पहाड़ी लघु चित्रकला की दुर्लभ कृतियां, ऐतिहासिक पांडुलिपियां और अन्य कलात्मक वस्तुएं रखी गई हैं।
बसोहली, जम्मू और कांगड़ा जैसी कला परंपराओं से जुड़े चित्र यहां की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं। इन कलाकृतियों के माध्यम से उस दौर के समाज, राजदरबार, प्रकृति और धार्मिक जीवन की झलक मिलती है।
पर्यटकों के लिए आकर्षण
आज मुबारक मंडी जम्मू आने वाले पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में शामिल है। इसकी पुरानी वास्तुकला और राजसी वातावरण लोगों को जम्मू के इतिहास से जोड़ता है। यहां आने वाले पर्यटक केवल इमारतों को नहीं देखते, बल्कि डोगरा संस्कृति और जम्मू के पुराने राजसी जीवन को भी करीब से समझने की कोशिश करते हैं।
हालांकि, समय के साथ परिसर की कई इमारतों को संरक्षण की जरूरत महसूस हुई है। ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि मुबारक मंडी जम्मू के अतीत की ऐसी निशानी है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है।
विरासत से भविष्य तक
मुबारक मंडी की पहचान सिर्फ पुराने महलों तक सीमित नहीं है। यह जम्मू की कला, संस्कृति, इतिहास और स्थापत्य परंपरा का प्रतीक है। इसकी दीवारों में डोगरा शासन की यादें और जम्मू के बदलते समय की कहानी दर्ज है।
आज जरूरत है कि इस ऐतिहासिक परिसर का संरक्षण आधुनिक सुविधाओं के साथ किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इसकी विरासत को समझ सकें। मुबारक मंडी जम्मू के लिए सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा है।
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