Kainchi Dham : कैंची धाम कैसे पहुंचे उत्तराखंड की हसीन वादियों में बसा कैंची धाम आज देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। नीम करोली बाबा के इस आश्रम में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। पहाड़, हरियाली और शांत वातावरण के बीच स्थित यह जगह आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ खूबसूरत यात्रा का अनुभव भी देती है।
कैंची धाम की शुरुआत की कहानी भी है खास
कैंची धाम के अस्तित्व में आने की कहानी बाबा नीम करोली महाराज से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि 25 मई 1962 को बाबा नीम करोली महाराज, श्री तुलाराम साह और श्री सिद्धि मां के साथ रानीखेत से नैनीताल लौट रहे थे। रास्ते में उन्होंने कैंची गांव में अपनी गाड़ी रुकवाई और पूर्णानंद तिवारी को बुलवाया।
बातचीत के दौरान पूर्णानंद तिवारी को याद आया कि वह बाबा से पहले भी एक रहस्यमयी रात में मिल चुके थे। इसके बाद बाबा ने कैंची गांव और आसपास के इलाके के बारे में जानकारी ली।
कैंची में क्षिप्रा नदी के दूसरी ओर घना जंगल था। बताया जाता है कि इसी स्थान पर कभी संत सोमवारी बाबा तपस्या किया करते थे और वहां एक पुरानी यज्ञशाला भी थी। बाद में प्रेमी बाबा का भी इस स्थान से जुड़ाव रहा।
मान्यता के अनुसार, बाबा नीम करोली महाराज अपने साथियों के साथ नदी पार करके इसी जंगल में पहुंचे और एक शिला पर बैठे। यहीं से इस स्थान के धार्मिक महत्व की नई शुरुआत हुई।
बिना बड़े नक्शे-इंजीनियर के तैयार हुआ कैंची धाम
कैंची धाम के निर्माण से जुड़ी कई कहानियां आज भी श्रद्धालुओं के बीच सुनाई जाती हैं। कहा जाता है कि बाबा ने जंगल की घास साफ करवाकर पुरानी यज्ञशाला के स्थान पर चबूतरा बनवाने का काम शुरू कराया। धीरे-धीरे यही स्थान आगे चलकर कैंची धाम के रूप में विकसित हुआ।
आज यहां नीम करोली बाबा का आश्रम और मंदिर परिसर श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण है। 15 जून को होने वाला कैंची धाम स्थापना दिवस यहां का सबसे बड़ा आयोजन माना जाता है, जब बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।
दिल्ली से कैंची धाम कैसे पहुंचे?
अगर आप दिल्ली से कैंची धाम घूमने या दर्शन के लिए जाना चाहते हैं, तो आपके पास ट्रेन, बस और कार से जाने के विकल्प हैं।
ट्रेन से यात्रा
दिल्ली से ट्रेन के जरिए जाना सबसे सुविधाजनक विकल्पों में से एक है। आप नई दिल्ली या आनंद विहार से काठगोदाम तक ट्रेन ले सकते हैं। काठगोदाम से कैंची धाम की दूरी करीब 40 किलोमीटर के आसपास है। स्टेशन से आपको टैक्सी, कैब या स्थानीय वाहन आसानी से मिल सकते हैं।
बस से कैसे जाएं?
दिल्ली के कश्मीरी गेट बस अड्डे से हल्द्वानी या नैनीताल के लिए बस ली जा सकती है। हल्द्वानी पहुंचने के बाद स्थानीय टैक्सी या बस से कैंची धाम जाया जा सकता है।
अपनी कार से कैंची धाम
अगर आप रोड ट्रिप पसंद करते हैं तो दिल्ली से अपनी कार से भी कैंची धाम जा सकते हैं। सामान्य तौर पर रूट दिल्ली-गाजियाबाद-मुरादाबाद-रामपुर-हल्द्वानी-भवाली-कैंची धाम की तरफ जाता है। ट्रैफिक और मौसम के आधार पर यात्रा का समय बदल सकता है।
कैंची धाम जाने का सही समय
कैंची धाम सालभर जाया जा सकता है, लेकिन गर्मियों और मानसून के दौरान पहाड़ों का मौसम तेजी से बदल सकता है। अगर आप शांत माहौल में घूमना चाहते हैं तो भीड़ वाले प्रमुख दिनों से अलग समय चुनना बेहतर रहेगा।
अगर पहली बार कैंची धाम जा रहे हैं, तो नैनीताल, भवाली और आसपास के पहाड़ी इलाकों को भी अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं। इससे आपकी ट्रिप सिर्फ धार्मिक यात्रा न रहकर एक खूबसूरत पहाड़ी सफर भी बन जाएगी।
यात्रा पर जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
- पहाड़ी रास्तों पर वाहन सावधानी से चलाएं।
- बारिश के मौसम में मौसम और सड़क की स्थिति जरूर जांचें।
- मंदिर परिसर में स्थानीय नियमों और अनुशासन का पालन करें।
- भीड़ वाले दिनों में यात्रा के लिए अतिरिक्त समय रखें।
- आसपास के प्राकृतिक क्षेत्रों में कचरा न फैलाएं।
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