PurvanchalTourism: अगर आप पूर्वांचल को सिर्फ शहरों, बाजारों और गांवों की पहचान से जानते हैं, तो सोनभद्र की यात्रा आपकी यह तस्वीर बदल सकती है। उत्तर प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित सोनभद्र विंध्य की पहाड़ियों, नदियों, जंगलों, झरनों, प्राचीन गुफाओं और ऐतिहासिक धरोहरों को अपने भीतर समेटे हुए है। यही वजह है कि इसे प्रकृति और इतिहास के साथ जुड़ा एक अलग तरह का पर्यटन क्षेत्र माना जा सकता है।
रिहंद बांध से शुरू हो सकती है यात्रा
सोनभद्र आने वाले पर्यटकों के लिए रिहंद बांध, जिसे गोविंद बल्लभ पंत सागर के नाम से भी जाना जाता है, प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। यह रिहंद नदी पर बना बांध है और इसका जलाशय उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश की सीमा तक फैला हुआ है। विशाल जलराशि और आसपास का भौगोलिक परिदृश्य इसे अलग पहचान देते हैं।
यहां पहुंचकर महसूस होता है कि सोनभद्र सिर्फ औद्योगिक क्षेत्र नहीं, बल्कि अपने भीतर प्राकृतिक सुंदरता का बड़ा संसार भी रखता है।
100 फीट की ऊंचाई से गिरता है पानी
प्रकृति प्रेमियों के लिए मुखाफॉल एक खास जगह है। जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर बेलन नदी के किनारे स्थित इस झरने में पानी लगभग 100 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरता है। आसपास की प्राकृतिक सुंदरता के साथ यहां मौजूद शैलचित्र इस जगह को और खास बनाते हैं।
बारिश के मौसम में झरने और आसपास की हरियाली का नजारा पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

हजारों साल पुरानी कहानी कहती हैं गुफाएं
सोनभद्र की पहचान सिर्फ झरनों और पहाड़ियों तक सीमित नहीं है। यहां की गुफाओं में मौजूद शैलचित्र इस क्षेत्र के प्राचीन इतिहास की झलक देते हैं। जिला प्रशासन के अनुसार, लखानिया गुफाओं के शैलचित्र करीब 4,000 वर्ष पुराने बताए जाते हैं। ये चित्र उस दौर के जीवन, संस्कृति और मान्यताओं को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
यानी सोनभद्र की यात्रा सिर्फ घूमने की यात्रा नहीं, बल्कि इतिहास के उन पन्नों को देखने का मौका भी है जो किताबों के बाहर पहाड़ों और चट्टानों पर दर्ज हैं।
विजयगढ़ और अगोरी किले सुनाते हैं इतिहास
सोनभद्र में ऐतिहासिक किलों की भी अपनी अलग कहानी है। जिले में विजयगढ़ किला, अगोरी किला और सोढरीगढ़ दुर्ग जैसे ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं। जिला प्रशासन के इतिहास संबंधी विवरण में इन किलों का उल्लेख मिलता है।

विजयगढ़ का नाम साहित्य से भी जुड़ता है। जिला प्रशासन के अनुसार, देवकीनंदन खत्री के प्रसिद्ध उपन्यास चंद्रकांता की नायिका विजयगढ़ की राजकुमारी बताई गई है।
धार्मिक आस्था का भी बड़ा केंद्र
सोनभद्र में धार्मिक पर्यटन की भी लंबी परंपरा है। शिवद्वार, पंचमुखी महादेव, गोथानी शिव मंदिर और ज्वालामुखी शक्तिपीठ जैसे स्थल श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। शिवद्वार में प्राचीन शिव मंदिर के साथ पुरातात्विक महत्व की मूर्तियां भी मौजूद हैं। वहीं गोथानी शिव मंदिर को रेणु, सोन और विजुल नदियों के संगम से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल बताया गया है।
सोनभद्र क्यों जाएं?
सोनभद्र की खासियत यही है कि एक ही जिले में आपको पहाड़, जंगल, नदी, झरना, बांध, गुफा चित्र, किले और धार्मिक स्थल देखने को मिल सकते हैं। यहां की पहचान पूर्वांचल की उस विविध संस्कृति से भी जुड़ती है, जिसमें स्थानीय परंपराएं, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत साथ-साथ दिखाई देती हैं।
इसलिए अगली बार अगर मन में सवाल आए कि पूर्वांचल में कहां घूमने जाएं, तो वाराणसी और प्रयागराज के आगे भी नजर डालिए। कैमूर की पहाड़ियों और सोन नदी की धरती की ओर बढ़िए।
कभी घूमने आइए पूर्वांचल की तरफ… सोनभद्र आपका इंतजार कर रहा है। विंध्य की पहाड़ियों से लेकर रिहंद बांध, प्राचीन गुफा चित्रों और ऐतिहासिक किलों तक—सोनभद्र पूर्वांचल के उन इलाकों में है जहां हर मोड़ पर एक नई कहानी मिलती है।
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