Friday, October 16, 2026
HomeUP Newsसहारनपुर में सपा की अंदरूनी खींचतान के बीच सियासी हलचल तेज, आज...

सहारनपुर में सपा की अंदरूनी खींचतान के बीच सियासी हलचल तेज, आज अखिलेश तो कल जयंत चौधरी

सहारनपुर: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में सहारनपुर इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आज सहारनपुर पहुंचे, जबकि राष्ट्रीय लोकदल के नेता एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी गुरुवार को यहां कार्यक्रम में शामिल होंगे। दोनों नेताओं के लगातार सहारनपुर दौरे ने क्षेत्र की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है।अखिलेश यादव का सहारनपुर दौरा पहले 6 सितंबर को प्रस्तावित था, लेकिन पार्टी के भीतर चल रही कथित खींचतान के चलते रैली को रद्द कर दिया गया था। यह कार्यक्रम दिवंगत चौधरी यशपाल के पुत्र रुद्रसेन और इंद्रसेन की ओर से आयोजित किया जाना था। रैली का मकसद चौधरी परिवार की राजनीतिक ताकत और उसके साथ खड़े समर्थकों का प्रदर्शन करना बताया जा रहा था।

पार्टी को मजबूत करने के बजाय कमजोर होने का बना डर

राजनीतिक हलकों में चर्चा रही कि प्रस्तावित रैली का उद्देश्य जहां समाजवादी पार्टी को मजबूत करना था, वहीं आपसी तालमेल की कमी के कारण इसके उलटे असर की आशंका पैदा हो गई। चौधरी परिवार चाहता था कि कार्यक्रम की पूरी कमान उसके हाथ में रहे और रैली का राजनीतिक श्रेय भी परिवार को मिले।

वहीं, पार्टी के दूसरे नेताओं की राय थी कि जब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं तो स्थानीय नेताओं और संगठन की भी इसमें पर्याप्त भागीदारी होनी चाहिए। इसी मुद्दे पर पार्टी के भीतर तालमेल बनाने की कोशिशें हुईं, लेकिन बात पूरी तरह नहीं बन सकी।

टिकट की दावेदारी भी बनी अहम वजह

बताया जा रहा है कि दादरी में राजकुमार भाटी की ओर से आयोजित रैली में सपा के राष्ट्रीय महासचिव रुद्रसेन की कथित उपेक्षा और नकुड़, गंगोह तथा देवबंद विधानसभा सीटों पर टिकट की दावेदारी को लेकर चौधरी परिवार के भीतर नाराजगी थी। इसी पृष्ठभूमि में परिवार ने अपनी ताकत दिखाने के लिए अलग रैली की तैयारी शुरू की थी।

कई महीने पहले ही कार्यक्रम की तारीख तय कर ली गई थी और बड़े स्तर पर भीड़ जुटाने की तैयारियां चल रही थीं। हालांकि, स्थानीय मुस्लिम नेताओं को अपेक्षित रूप से साथ नहीं जोड़े जाने के बाद कार्यक्रम के समीकरण बिगड़ने लगे।

जयंत चौधरी के कार्यक्रम से बदला राजनीतिक परिदृश्य

इसी बीच पास के कस्बे में 3 सितंबर को जयंत चौधरी के एक प्रतिष्ठित गुर्जर परिवार के कार्यक्रम में पहुंचने की सूचना ने सियासी गतिविधियों को और बढ़ा दिया। इसके बाद एक कॉलेज में प्रस्तावित कार्यक्रम को रैली का स्वरूप देकर उसका नाम ‘स्वाभिमान रैली’ रखा गया।

रालोद के प्रमुख गुर्जर चेहरों में शामिल चंदन चौहान ने भी क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा दी और रैली की तैयारियां जोर पकड़ने लगीं। इसके बाद चौधरी यशपाल परिवार की ओर से अखिलेश यादव को भी कार्यक्रम में लाने के प्रयास किए गए, जिसमें उन्हें सफलता मिली।

गुर्जर वोट बैंक पर नजर

सहारनपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में गुर्जर मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। ऐसे में एक ही क्षेत्र में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के कार्यक्रमों ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। अब निगाह इस बात पर है कि आने वाले दिनों में चौधरी परिवार किस राजनीतिक खेमे के साथ अपनी सक्रियता बढ़ाता है और इसका सपा तथा रालोद की स्थानीय राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

यह खबर भी पढे –26वें दिन ‘टॉक्सिक’ से आगे निकली ‘हनुमान अंश’, बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने मारी बड़ी बाजी

Himanshu Dubey
Himanshu Dubeyhttps://nation9network.com
हिमांशु दुबे पूर्वांचल की मिट्टी और अवध की तहज़ीब से निकलकर दिल्ली के दिल तक का सफ़र—जहाँ शब्दों ने पहचान दी और पत्रकारिता ने दिशा तय की।मीडिया और समाज को करीब से समझने की जिज्ञासा मुझे जामिया मिल्लिया इस्लामिया तक ले गई, जहाँ मैंने मास मीडिया का अध्ययन किया। वर्तमान में मैं भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) का छात्र हूँ और पत्रकारिता को सिर्फ़ एक पेशे के रूप में नहीं, बल्कि समाज को देखने, समझने और उसके सवालों को सामने लाने के माध्यम के रूप में देखता हूँ। आज़मगढ़ | लखनऊ | दिल्ली | जम्मू 📍 मैं समाज, राजनीति, ज़मीनी सरोकार के साथ वर्तमान में समसामयिक विषयों पर लिखता हूँ इसके साथ ही टेक्नोलॉजी, डिफेंस, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, देश और लाइफस्टाइल से जुड़ी खबरों को सरल और सहज भाषा में पाठकों तक पहुंचाना मेरी लेखन शैली और विवेक की प्राथमिकता है। संपर्क: ✉️ iamhimanshu032@gmail.com
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post