चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली को लेकर आई एक मीडिया रिपोर्ट के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस ने सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है। AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि “कोई अकेला व्यक्ति चुनाव आयोग नहीं चला सकता” और ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग की।
कांग्रेस ने भी सुर मिलाते हुए कहा कि “एक पूरे व्यक्ति ने चुनाव आयोग को हाईजैक कर लिया है” और CEC से इस्तीफे की मांग की।
SIR गैरकानूनी, 13 करोड़ नाम कटे
केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि Special Intensive Revision (SIR) के तहत देशभर में लगभग 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे गए, जबकि यह प्रक्रिया बहुमत से मंजूर नहीं हुई। उनका दावा है कि कई महीनों से EC की बैठकें नहीं हुईं और ज्ञानेश कुमार अकेले आदेश जारी कर रहे हैं।
उन्होंने मांग की:
- पूरी SIR प्रक्रिया रद्द की जाए।
- SIR के तहत हुए सभी बदलाव निरस्त किए जाएं।
- तीन साल पुरानी वोटर लिस्ट बहाल की जाए।
- ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी हो और उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाए।
केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में बैठे अधिकारी तय कर रहे हैं कि किसका नाम रहेगा और किसका कटेगा, जबकि नाम जोड़ने-काटने का अधिकार ERO से छीन लिया गया है।
राहुल गांधी का बड़ा हमला
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने SIR और वोटर लिस्ट विवाद को “भारतीय लोगों के खिलाफ अपराध” और “संविधान पर सीधा हमला” बताते हुए BJP, RSS और चुनाव आयोग पर देशद्रोह का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “इंसाफ जरूर होगा।”
राहुल ने चुनाव आयोग और अधिकारियों को खुली चेतावनी दी: “टाइम आएगा, हम आपको पकड़ेंगे… आप नहीं बचेंगे।” उन्होंने इसे “वोट चोरी, सरकार चोरी, अब पार्टी चोरी” की कड़ी में रखते हुए लोकतंत्र के लिए खतरा बताया।
10 महीने में 14 औपचारिक आपत्तियां
द हिंदू एक्सप्रेस/इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। इनमें नए मतदाताओं का पंजीयन, नाम हटाना-जोड़ना, SIR के तहत अपीलें और ई-रोल सिस्टम की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल थे।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि कुछ आदेश उनकी जानकारी के बिना जारी हुए और उन्हें फैसलों की जानकारी मीडिया से मिली।
EC का जवाब
चुनाव आयोग ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि पिछले एक साल में उसके सभी प्रमुख फैसले—SIR सहित—सर्वसम्मति से लिए गए। EC ने कहा कि संस्था में अलग-अलग राय आना और आंतरिक नोट्स/प्रश्न सामान्य deliberation का हिस्सा हैं, लेकिन अंतिम निर्णय unanimity से हुए।
EC सूत्रों का कहना है कि सभी बड़े आदेशों पर CEC और दोनों EC के हस्ताक्षर होते हैं और किसी ने आधिकारिक तौर पर “dissent” रिकॉर्ड नहीं किया।
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