RedFortHistory: दिल्ली के मध्य स्थित लाल किला भारत के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है। लाल बलुआ पत्थर से बनी इसकी विशाल दीवारें केवल मुगल स्थापत्य की कहानी नहीं कहतीं, बल्कि दिल्ली के बदलते राजनीतिक इतिहास और भारत की स्वतंत्रता की यात्रा की भी गवाह रही हैं। UNESCO ने लाल किला परिसर को 2007 में विश्व धरोहर सूची में शामिल किया था।
शाहजहां ने बनवाया था लाल किला
लाल किले का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहां के शासनकाल में नई राजधानी शाहजहानाबाद के केंद्र के रूप में किया गया। निर्माण अप्रैल 1639 में शुरू हुआ और 1648 में पूरा हुआ। शाहजहां ने अपनी राजधानी आगरा से दिल्ली स्थानांतरित कर शाहजहानाबाद को विकसित किया था।
किले की पहचान इसकी विशाल लाल बलुआ पत्थर की दीवारों से होती है। इसका परिसर लगभग 656 मीटर लंबा और 328 मीटर चौड़ा है, जबकि इसकी दीवारें कुछ स्थानों पर करीब 23 मीटर तक ऊंची हैं।
मुगल स्थापत्य का शानदार उदाहरण
लाल किले की वास्तुकला में भारतीय, फारसी, तैमूरी और इस्लामी स्थापत्य परंपराओं का मेल दिखाई देता है। किले के भीतर दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, नहर-ए-बहिश्त, हमाम और हयात-बख्श बाग जैसे महत्वपूर्ण हिस्से हैं। UNESCO के अनुसार, लाल किले की योजना और वास्तुकला ने बाद में राजस्थान, दिल्ली, आगरा और दूसरे क्षेत्रों की इमारतों और उद्यानों को भी प्रभावित किया।
किले के पास स्थित सलीमगढ़ किला इससे भी पुराना है। इसका निर्माण 16वीं शताब्दी में इस्लाम शाह सूरी के समय हुआ था और बाद में यह लाल किला परिसर का हिस्सा बन गया।
1857 के बाद बदला लाल किले का स्वरूप
1857 के विद्रोह के बाद अंग्रेजों ने लाल किले पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। इसके बाद किले का एक बड़ा हिस्सा सैन्य उपयोग में आने लगा। ब्रिटिश शासन के दौरान कई मुगलकालीन संरचनाओं को नुकसान पहुंचा या हटाया गया और उनकी जगह सैन्य इमारतें बनाई गईं। मुगल उद्यानों के स्वरूप में भी बदलाव किया गया।
इस तरह लाल किला केवल मुगल इतिहास का स्मारक नहीं रहा, बल्कि औपनिवेशिक दौर में भारत के बदलते राजनीतिक परिदृश्य का भी हिस्सा बन गया।
आजादी के बाद बना राष्ट्रीय प्रतीक
लाल किले का सबसे महत्वपूर्ण आधुनिक इतिहास भारत की स्वतंत्रता से जुड़ा है। 15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के बाद लाल किला राष्ट्रीय समारोहों का प्रमुख केंद्र बना। आज भी हर वर्ष 15 अगस्त को प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हैं। UNESCO भी लाल किले को भारतीय स्वतंत्रता के ऐतिहासिक उत्सव से जुड़े महत्वपूर्ण स्थल के रूप में दर्ज करता है।
2007 में विश्व धरोहर का दर्जा
लाल किला परिसर को वर्ष 2007 में UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। UNESCO ने इसे मुगल वास्तुकला के विकास और विभिन्न स्थापत्य परंपराओं के मेल का महत्वपूर्ण उदाहरण माना है। वर्तमान में लाल किला परिसर का संरक्षण और प्रबंधन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन है।
आज लाल किले की दीवारों में एक साथ कई सदियां दिखाई देती हैं—शाहजहां का शाहजहानाबाद, मुगल साम्राज्य का वैभव, 1857 के बाद का ब्रिटिश दौर और स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय इतिहास। यही वजह है कि लाल किला दिल्ली की एक ऐतिहासिक इमारत से आगे बढ़कर भारत की ऐतिहासिक स्मृति और राष्ट्रीय जीवन का महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका है।






