ElectionCommission: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विपक्षी INDIA ब्लॉक एक बार फिर महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। विपक्षी दल लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में नोटिस देने की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्ताव का नया ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है और इसमें पिछली कोशिशों की तुलना में अधिक आरोप शामिल किए जा सकते हैं।
यह घटनाक्रम चुनाव आयोग के भीतर Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सामने आई कथित असहमति के बीच आया है। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर कई बार आपत्तियां दर्ज कीं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन टिप्पणियों को आंतरिक समीक्षा की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताया है और कहा है कि आयोग के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
दोनों सदनों में नोटिस देने की तैयारी
INDIA ब्लॉक की ओर से प्रस्ताव को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में लाने की तैयारी की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्ताव का ड्राफ्ट सांसदों के बीच प्रसारित किया जा रहा है ताकि जरूरी समर्थन जुटाया जा सके। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि नोटिस के लिए लोकसभा में 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता बताई गई है।
विपक्ष की यह पहल पहले की गई कोशिशों के बाद सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, इससे पहले भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के प्रयास किए जा चुके हैं। अब नए प्रस्ताव में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े मुद्दों को भी शामिल किए जाने की बात कही जा रही है।
राहुल गांधी ने CEC पर लगाए गंभीर आरोप
इसी विवाद के बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया में कथित ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मतदाताओं के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के भीतर SIR और अन्य चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर असहमति सामने आई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी राजनीतिक आरोप लगाए और कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवालों का जवाब मिलना चाहिए।
‘वोट चोरी’ से लेकर ‘कानून चोरी’ तक का दावा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने अपने पुराने ‘वोट चोरी’ आरोप को दोहराते हुए कहा कि यदि चुनावी प्रक्रिया में वोटों के साथ गड़बड़ी होती है तो उसका असर संसद और कानून बनाने की प्रक्रिया पर भी पड़ता है। उन्होंने इसी संदर्भ में ‘वोट चोरी से कानून चोरी’ की बात कही। यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि के रूप में कोई निष्कर्ष इन रिपोर्टों में स्थापित नहीं किया गया है।
उन्होंने अलग-अलग राज्यों में सत्ता विरोधी रुझान को लेकर भी सवाल उठाए और बीजेपी के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी को लेकर अपनी राजनीतिक दलील रखी।
चुनाव आयोग का क्या कहना है?
विपक्ष के आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों से जुड़ी रिपोर्टों पर कहा है कि आयोग के सदस्यों द्वारा लिखित टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और कानूनी समीक्षा उसकी सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि SIR सहित उसके फैसलों को कानूनी आधार प्राप्त है और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
फिलहाल INDIA ब्लॉक के प्रस्ताव का अंतिम मसौदा और उसमें शामिल किए जाने वाले सभी आरोप सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। ऐसे में अगले चरण में संसद में नोटिस दाखिल होने के बाद ही प्रस्ताव की विस्तृत सामग्री स्पष्ट होगी।
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