GSLV-F17 Rocket: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के GSLV-F17 रॉकेट को लेकर अंतरिक्ष क्षेत्र में काफी रुचि है। GSLV यानी Geosynchronous Satellite Launch Vehicle भारत का एक महत्वपूर्ण प्रक्षेपण यान है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से भारी उपग्रहों को भू-समकालिक कक्षा (Geosynchronous Orbit) में स्थापित करने के लिए किया जाता है। यह रॉकेट भारत की स्वदेशी अंतरिक्ष प्रक्षेपण क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।
- लॉन्च तिथि व समय: 4 सितंबर 2026, सुबह 2:55 बजे IST
- लॉन्च पैड: सेकंड लॉन्च पैड, सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC-SHAR), श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश
- रॉकेट: GSLV-F17 (जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल), 19वीं GSLV फ्लाइट
- पेलोड: EOS-05 (पूर्व में GISAT-1A के नाम से जाना जाता था), वजन 2,367 kg
- कक्षा: सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (Sub-GTO) — पेरिजी 170 km, एपोजी 28,934 km, झुकाव ~19.28°
- फ्लाइट अवधि: लगभग 18–19 मिनट में सैटेलाइट सफलतापूर्वक अलग हुआ
GSLV-F17 क्या है?
GSLV-F17, GSLV रॉकेट परिवार का एक मिशन है। GSLV को विशेष रूप से ऐसे उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए विकसित किया गया है, जिनका इस्तेमाल संचार, मौसम, नेविगेशन और अन्य अंतरिक्ष आधारित सेवाओं में किया जाता है। इस रॉकेट की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसका क्रायोजेनिक अपर स्टेज शामिल है, जो अत्यधिक कम तापमान वाले तरल हाइड्रोजन और तरल ऑक्सीजन जैसे प्रणोदकों का इस्तेमाल करता है।
क्रायोजेनिक तकनीक को दुनिया की सबसे जटिल रॉकेट तकनीकों में गिना जाता है। भारत ने लंबे तकनीकी विकास और परीक्षणों के बाद इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल की है।
GSLV रॉकेट की खासियत
GSLV तीन चरणों वाला प्रक्षेपण यान है। इसके पहले चरण में ठोस ईंधन और सहायक स्ट्रैप-ऑन मोटरों का इस्तेमाल किया जाता है। दूसरे चरण में तरल प्रणोदक आधारित इंजन काम करता है, जबकि तीसरे चरण में क्रायोजेनिक इंजन का उपयोग किया जाता है।
क्रायोजेनिक इंजन का मुख्य लाभ यह है कि यह अपेक्षाकृत कम वजन में अधिक ऊर्जा प्रदान कर सकता है। यही वजह है कि भारी उपग्रहों को ऊंची कक्षाओं तक पहुंचाने में इस तकनीक का विशेष महत्व है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है GSLV-F17?
GSLV-F17 जैसे मिशन भारत की आत्मनिर्भर अंतरिक्ष क्षमता को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण हैं। संचार उपग्रहों और अन्य भारी पेलोड को स्वदेशी रॉकेट से लॉन्च करने की क्षमता भारत को विदेशी प्रक्षेपण सेवाओं पर निर्भरता कम करने में मदद करती है।
इसके अलावा, ऐसे मिशन ISRO की तकनीकी क्षमता और भविष्य के बड़े अंतरिक्ष अभियानों के लिए जरूरी अनुभव को मजबूत करते हैं। भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के विस्तार और वैश्विक वाणिज्यिक लॉन्च बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिहाज से भी स्वदेशी प्रक्षेपण यान महत्वपूर्ण हैं।






