लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्वास्थ्य विभाग की ANM (ऑक्सिलियरी नर्स मिडवाइफ) कर्मियों का प्रदर्शन लगातार चौथे दिन भी जारी है। इको गार्डन में प्रदेश के 75 जिलों से आईं महिला स्वास्थ्यकर्मी अपने छोटे बच्चों के साथ धरने पर बैठी हैं। इनकी मुख्य मांग समान वेतन, नियमितीकरण, कार्यस्थल पर सुरक्षा और भेदभावमुक्त माहौल की है।
महिला कर्मियों का कहना है कि जब काम और मेहनत बराबर है, तो वेतन में इतना अंतर क्यों है। परमानेंट ANM कर्मियों को जहां 50,000 रुपये मासिक वेतन मिल रहा है, वहीं इन्हें केवल 10,000 रुपये दिए जा रहे हैं। कई कर्मियों ने 10 साल से अधिक सेवा दी है, लेकिन पिछले दो सालों से उनका वेतन नहीं बढ़ा है। ऐसे में वे अपने और परिवार की देखभाल कैसे करें, यह सवाल वे उठा रही हैं।
प्रदर्शन के दौरान “हमारी मेहनत का सम्मान दो” और “हमें भीख नहीं, हक चाहिए” जैसे नारे गूंज रहे हैं। महिलाओं ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले भी अपने स्तर पर मांगें उठाईं, लेकिन किसी अधिकारी ने गौर नहीं किया। अब वे न्याय के लिए सड़कों पर उतर आई हैं।
इनकी प्रमुख मांगों में समान वेतन, नियमितीकरण, स्वास्थ्य बीमा, कार्यस्थल पर सुरक्षा और मानसिक शोषण पर रोक शामिल है। साथ ही, ANM शोषण की शिकायतों को सुनने की भी मांग की जा रही है। महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि चुनाव से पहले उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे NOTA का इस्तेमाल करेंगी।
लखनऊ प्रशासन और पुलिस विभाग इस आंदोलन को देखते हुए सतर्क हो गया है। चारबाग और विधानसभा मार्ग पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और बैरिकेडिंग की तैयारियां की जा रही हैं। 21 सितंबर से प्रस्तावित यह प्रदर्शन लगातार चल रहा है और यदि सरकार जल्द नीतिगत निर्णय नहीं लेती, तो आंदोलन आगे भी जारी रहने की संभावना है।
यह आंदोलन केवल वेतन की लड़ाई नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा की भी लड़ाई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में महिला कर्मियों का योगदान अहम है, लेकिन अक्सर उनकी आवाज दबा दी जाती है। लखनऊ का यह प्रदर्शन पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य कर्मियों के अधिकारों को लेकर बहस छेड़ सकता है।
Also Read- CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फिर महाभियोग की तैयारी, INDIA ब्लॉक ने तैयार किया नया ड्राफ्ट






